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Thursday, 14 November 2013

Hanuman Chalisa ( श्री हनुमान चालीसा )

श्री हनुमान चालीसा

।।दोहा।। श्री गुरुचरण सरोज रज, निज मन मुकुरसुधार |
बरनौ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फलचारि |

बुद्धिहीन तनु जानिके , सुमिरौ पवनकुमार |
बल बुद्धि विद्या देहुमोहि हरहु कलेशविकार ||


जय हनुमान ज्ञान गुनसागर, जय कपीसतिंहु लोक उजागर|
रामदूत अतुलित बल धामाअंजनि पुत्र पवनसुत नामा ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमतिनिवार सुमति केसंगी |
कंचन बरन बिराजसुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचितकेसा ||

हाथ ब्रज ध्वजा विराजे कान्धेमूंज जनेऊ साजे|
शंकर सुवन केसरीनन्दन तेज प्रतापमहा जग बन्दन||

विद्यावान गुनी अतिचातुर राम काजकरिबे को आतुर|
प्रभु चरित्र सुनिबे कोरसिया रामलखन सीतामन बसिया ||

सूक्ष्म रूप धरिसियंहि दिखावा बिकट रूपधरि लंक जरावा|
भीम रूप धरिअसुर संहारे रामचन्द्रके काज सवारे||

लाये सजीवन लखन जियायेश्री रघुबीर हरषिउर लाये |
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाईतुम मम प्रियभरत सम भाई||

सहस बदन तुम्हरोजस गावें असकहि श्रीपति कण्ठलगावें |
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारदसारद सहित अहीसा||

जम कुबेर दिगपाल कहाँते कबि कोबिदकहि सके कहाँते |
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हाराम मिलाय राजपद दीन्हा ||

तुम्हरो मन्त्र विभीषन मानालंकेश्वर भये सबजग जाना |
जुग सहस्र जोजन परभानु लील्यो ताहिमधुर फल जानु||

प्रभु मुद्रिका मेलि मुखमांहि जलधि लाँघगये अचरज नाहिं|
दुर्गम काज जगतके जेते सुगमअनुग्रह तुम्हरे तेते ||

राम दुवारे तुम रखवारेहोत आज्ञाबिनु पैसारे |
सब सुख लहेतुम्हारी सरना तुमरक्षक काहें कोडरना ||

आपन तेज सम्हारोआपे तीनों लोकहाँक ते काँपे|
भूत पिशाच निकट नहींआवें महाबीर जबनाम सुनावें ||

नासे रोग हरेसब पीरा जपतनिरंतर हनुमत बीरा |
संकट ते हनुमानछुड़ावें मन क्रमबचन ध्यान जोलावें ||

सब पर रामतपस्वी राजा तिनकेकाज सकल तुमसाजा |
और मनोरथ जो कोईलावे सोई अमितजीवन फल पावे||

चारों जुग परतापतुम्हारा है परसिद्धजगत उजियारा |
राम रसायन तुम्हरे पासासदा रहो रघुपतिके दासा ||

तुम्हरे भजन रामको पावें जनमजनम के दुखबिसरावें |
अन्त काल रघुबरपुर जाई जहाँजन्म हरि भक्तकहाई ||

और देवता चित्त धरई हनुमत सेईसर्व सुख करई|
संकट कटे मिटेसब पीरा जपतनिरन्तर हनुमत बलबीरा ||

जय जय जयहनुमान गोसाईं कृपा करोगुरुदेव की नाईं|
जो सत बारपाठ कर कोईछूटई बन्दि महासुखहोई ||

जो यह पाठपढे हनुमान चालीसाहोय सिद्धि साखीगौरीसा |
तुलसीदास सदा हरिचेरा कीजै नाथहृदय मँह डेरा||

।।दोहा।। पवन तनयसंकट हरन मंगलमूरति रूप |

राम लखन सीतासहित हृदय बसहुसुर भूप ||

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