Definition List

Pages

Tuesday, 19 November 2013

बापू की सीख



उन दिनों बापू यरवदाजेल में थे।जेल में हीउनका ऑपरेशन हुआथा। ऑपरेशन होनेके बाद वहबहुत कमजोर होगए थे। चलने-फिरने में भीउनको कठिनाई होतीथी। वह हमेशाखड़ाऊं पहनते थे। जेलमें भी वहखड़ाऊं पहनकर ही गएथे। गांधीजी जोखड़ाऊं पहनकर जेल गएथे वे टूटगई थीं औरजेल से मिलनेवाली खड़ाऊं अत्यंतभारी थीं, जिन्हेंपहनकर उन्हें तकलीफहोती थी। ऑपरेशनहोने के बादतो उन्हें पहनकरचलना और भीमुश्किल हो गयाथा। एक रातको उन्हें खड़ाऊंपहनकर चलने मेंअत्यंत तकलीफ का सामनाकरना पड़ा।
उनकी पीड़ा को उनकेआश्रम के सहयोगीने देखा तोबहुत दु:खीहुआ। वह वहांउनसे मिलने आयाथा। उसने अगलेदिन चुपके सेखड़ाऊं की हल्कीजोड़ी लाकर वहांपर रख दीऔर जेल सेमिली भारी खड़ाऊंवहां से हटादी। सुबह होनेपर गांधीजी जबखड़ाऊं पहनने के लिएखड़े हुए तोउन्होंने अपनी खड़ाऊंकी तलाश शुरूकर दी। जबवे कहीं नहींमिलीं तो उनकीनजर नई खड़ाऊंपर पड़ी। गांधीजी ने उन्हेंपहना नहीं औरबोले, 'पता नहींकौन अपनी खड़ाऊंयहां छोड़ गयाहै।' संयोग सेउस समय वहआश्रमवासी भी वहींथा। वह उनकेपास आकर बोला, 'बापू, ये नईखड़ाऊं मैं आपकेलिए ही लायाहूं।
आपको अपनी खड़ाऊंपहनने में तकलीफहोती थीं। मुझसेआपकी तकलीफ देखीनहीं गई। इसलिएमैंने उन्हें यहांसे हटा दीं।' इस पर गांधीजीबोले, 'लगता है, आश्रम के चारोंतरफ रुपयों कीबरसात हो रहीहै। शायद इसलिएतुम्हें नई खड़ाऊंलाने की सूझीहै। क्या तुमजानते हो किजो लोग आश्रमको रुपए भेजतेहैं, उन्हें विश्वासहै कि उनकीएक-एक पाईका सदुपयोग होताहोगा। लेकिन यहतो उनके साथविश्वासघात हुआ।' यह सुनकरआश्रमवासी चुप होगया। बापू नेकहा कि आश्रमका एक रुपयाभी व्यर्थ केकार्यों पर खर्च किया जाए।

यदि आपके पासकोई  जानकारी हैजो आप हमारेसाथ share करना चाहते  हैं
तो कृपया उसेअपनी फोटो केसाथ E-mail करें. हमारी Id हैtejprakash1234@gmail.com
पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!
इस ब्लाग के किसी भी पोस्ट में अगर किसी को कॅापीराइट आपत्ति है तो सूचित करे पोस्ट हटा लिया जायेगा

0 comments: