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Saturday, 16 November 2013

धनतेरस ( Dhanteras )


धनतेरस  ( Dhanteras )
कार्तिक मासमें  त्रयोदशी का विशेष महत्वहै, विशेषत: व्यापारियों औरचिकित्सा एवं औषधि विज्ञान केलिए यह दिनअति शुभ मानाजाता है।
दिवालीसे दो दिनपूर्व धन्वंतरी जयंतीमनाई जाती है।महर्षि धन्वंतरी कोआयुर्वेद स्वस्थ जीवनप्रदान करने वालेदेवता के रूपमें भी पूजनीयहै, जैसे धन-वैभव के लिएदेवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं,  उसीप्रकार स्वस्थ जीवनके लिए स्वास्थ्य केदेवता धन्वंतरी कीआराधना की जातीहै।
धनतेरसकी सायंकाल कोयमदेव निमित्त दीपदानकिया जाता है।ऐसा करने सेयमराज के कोपसे सुरक्षा मिलतीहै। मान्यता हैकि यदि गृहलक्ष्मी इसदिन दीपदान करेंतो पूरे परिवारको रोग-मुक्तिमिलती है औरपूरा परिवार स्वस्थरहता है।
इसदिन पीतल औरचाँदी खरीदने चाहिएक्योंकि पीतल भगवान धन्वंतरी कीधातु है। पीतलखरीदने से घरमें आरोग्य, सौभाग्य औरस्वास्थ्य लाभ प्राप्त होताहै।
व्यापारी वर्गइस दिन नएबहीखाते खरीदता है और इन्हेंगद्दी पर स्थापित करतेहै। तत्पश्चात दिवालीपर इनका पूजनकिया जाता है।लक्ष्मीजी के आह्वान काभी यही दिनहोता है।

देवताओं के वैद्य मानेजाने वाले धन्वन्तरि, चिकित्सा केभी देवता मानेजाते हैं इसलिएचिकित्सकों के लिए भीधनतेरस का विशेषमहत्व है। आयुर्वेद चिकित्सक अपनेचिकित्सालय पर धनतेरस केदिन  धन्वंतरी देव की विशेषपूजा का आयोजनकरते हैं। पुरातनकाल सेअधिकांश आयुर्वेदिक औषधियों का इसी दिननिर्माण किया जाता है साथ हीऔषधियों को आज केदिन अभिमंत्रित करनेका भी प्रचलनहै।
धार्मिक पौराणिक मान्यता है साथ सागरमंथन के समयभगवान धन्वन्तरि अमृतकलश के साथअवतरित हुए थे।उनके कलश लेकरप्रकट होने कीघटना के प्रतीकस्वरूप ही  बर्तन खरीदनेकी परम्परा काप्रचलन हुआ। पौराणिक मान्यता हैकि इस दिनधन (चल याअचल संपत्ति) खरीदनेसे उसमें 13 गुणावृद्धि होती है।धन तेरस केदिन  ग्रामीण धनिये के बीजभी खरीदते हैं। 
दिवाली के बादइन बीजों कोवे अपने खेतोंमें बो देतेहैं। 
देशके कुछ ग्रामीण इलाकोंमें इस दिनलोग अपने पशुओंकी पूजा करतेहैं। इसके पीछेवजह यह हैकि पशुओं कोवे अपनी आजीविका चलानेका सबसे महत्वपूर्ण साधनमानते हैं

पौराणिक मान्यता है कि माँलक्ष्मी को विष्णु जीका श्राप थाकि उन्हें 13 वर्षोंतक किसान केघर में रहनाहोगा। श्राप केदौरान किसान काघर धनसंपदा सेभर गया। श्रापमुक्ति केउपरांत जब विष्णुजी लक्ष्मी कोलेने आए तबकिसान ने उन्हेंरोकना चाहा। लक्ष्मीजी नेकहा कल त्रयोदशी हैतुम साफ-सफाईकरना, दीप जलानाऔर मेरा आह्वानकरना। किसान नेऐसा ही कियाऔर लक्ष्मी कीकृपा प्राप्त की तभी सेलक्ष्मी पूजन की प्रथाका प्रचलन आरंभहुआ।

धनतेरस के दिनचांदी खरीदने कीभी  परंपरा है। चांदीको चन्द्रमा काप्रतीक मानते हैंजो शीतलता  प्रदान करतीहै जिससे मनमें संतोष रूपीधन का वासहोता है। चाँदीकुबेर की धातुहै।  इस दिन चाँदीखरीदने से घरमें यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा मेंवृद्धि होती है।
धनतेरस की सांय घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाए जाते हैं और इसी के साथ दीपावली का शुभारंभ होता है।
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