चाह गयी चिंतामिटी मन हुआबेपरवाह
जिसको कुछ नाचाहिए वे साहिबके शाह
रहिमन वे नरमर चुके जोकहीँ मांगन जाई
उन्ते पहले वोमुए जिन मुखनिकसत नाह
रहिमन धागा प्रेमका, मत तोड़ोचटकाए
टूटे से फिरना जुडे, जुडेगाँठ पर जाये।
तरुवर फल नहीखात है, सरोवरपीवत ना पान
रहिमन कही परकाज हित, सम्पत्तिसुचाही सुजान
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