देवी-देवताओं की कृपाहमेशा हम परबनी रहे इसकेलिए घर-घरमें भगवान कीप्रतिमाएं रखने औरछोटे-छोटे मंदिरबनाने की परंपरापुराने समय सेचली आ रहीहै। घर मेंकैसी मूर्तियां रखनीचाहिए और किसप्रकार की मूर्तियांनहीं रखना चाहिए, इस संबंध मेंशास्त्रों में कईप्रकार के नियमबताए गए हैं।
वैसे तो कण-कण मेंपरमात्मा विद्यमान है। फिरभी भगवान कीआराधना में हमाराध्यान या मनपूरी तरह सेलगा रहे इसकेलिए मूर्तियों कीपूजा की जातीहै। मूर्तियों कीपूजा के संबंधमें एक बातध्यान रखने योग्यहै कि यदिकोई मूर्ति किसीप्रकार से खंडितहो जाए तोउसकी पूजा नहींकरना चाहिए। केवलशिवलिंग को खंडितनहीं माना जाताहै क्योंकि भगवानशिव को निराकारमाना गया है।अत: शिवलिंग हरस्थिति में पूजनीयऔर पवित्र रहताहै।
ईश्वर की भक्तिमें भगवान कीमूर्ति का अत्यधिकमहत्व है। प्रभुकी मूर्ति देखतेही भक्त केमन में श्रद्धाऔर भक्ति केभाव स्वत: हीउत्पन्न हो जातेहैं। शास्त्रों केअनुसार भगवान की प्रतिमापूर्ण होना चाहिए, यदि मूर्ति खंडितहो तो उसेपूजा योग्य नहींमाना जाता है।खंडित मूर्ति कीपूजा को अपशकुनभी माना गयाहै। प्रतिमा कीपूजा करते समयभक्त का पूराध्यान भगवान औरउनके स्वरूप कीओर ही होताहै।
अत: ऐसे मेंयदि प्रतिमा खंडितहोगी तो भक्तका सारा ध्यानउस मूर्ति केखंडित हिस्से परचले जाएगा औरवह पूजा मेंमन नहीं लगासकेगा। जब पूजामें मन नहींलगेगा तो व्यक्तिभगवान की ठीकसे भक्ति नहींकर सकेगा। पूजाअधूरी रह जाएगी।इसी बात कोसमझते हुए प्राचीनकाल से हीखंडित मूर्ति कीपूजा को अपशकुनबताते हुए उसकीपूजा निष्फल बताईगई है।
खंडित मूर्ति के कारणवातावरण में नकारात्मकऊर्जा अधिक सक्रीयहो जाती है, इसी कारण ऐसीप्रतिमाओं को घरमें भी नहींरखना चाहिए। खंडितप्रतिमाओं को किसीपवित्र नदी यासरोवर में प्रवाहितकर देना चाहिए।
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